नमस्कार,
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| twins pregnancy symptoms, |
जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं, एक होते हैं आइडेंटिकल ट्विन्स, ओर दूसरे होते हैं नोन आइडेंटिकल ट्विन्स ।
जुड़वा बच्चे कैसे बनते हैं ॽ
इस जानकारी देने से पहले मैं आपको यह बताना चाहता हूं , कि जो फीमेल फुटोलिटि सिस्टम है यानी जो महिला प्रजन प्रणाली है । उसमें श्रोनी के बीचों बीच बच्चेदानी होती है । बच्चेदानी के दोनो ओर एक एक फलोबियन ट्यूब होती है जिसे हम नली भी कहते है । ओर दोनों के आखिर में एक एक अंडाशय होता है , जिसे हम ओवरी कहते हैं । अब होता क्या है हर महीने दोनो ओवरी में से एक ओवरी अंडा तैयार यानी ऐंग तैयार करती है , जो फलोबियन ट्यूब में प्रवेश करता है । ओर अगर उसका यहां मेल शुक्राणु से हो जाता है , तो फुटलाइजेशन यानी की की निषेचन हो जाता है । ओर अगर शुक्राणु से मेल नहीं होता फुटलाइजेशन नहीं होती तो अंडा जो है बच्चेदानी में आता है ओर महिला को पीरियड यानी की माशिक आना स्टार्ट हो जाती है ।
अब इस पोस्ट के माध्यम से जान सकते हैं कि आइडेंटिकल जुड़वा बच्चे कैसे बनते हैं । सबसे पहले आप इस पोस्ट में जान सकते हैं, कि अंडे की एक ठेली होती है उसमें से एक से एक अंडा तैयार होकर अंडाशय में से निकल जाता है । सेक्स के समय जो पुरूष के शुक्राणु रिलीज होते है वो तेजी से फैलते हुऐ बच्चेदानी के लिंक से गुजरते हुवे बच्चेदानी में प्रवेश करते हैं , ओर वहाँ से फलोबियन ट्यूब में प्रवेश करते है। फलोबियन ट्यूब में शुक्राणु तेजी से अंदे की और बढते हैं, ओर केवल एक ही शुक्राणु जो अंदे के अंदर प्रवेश करता है ।ओर जायगॉट बनाता है । कुच समय में जायगॉट जो है वो दो हिस्सों में बंट जाता है । ओर इस तरह से दो भ्रूण तैयार हो जाता है । ओर दोनों भ्रूण जो है उनमें विकास भी होता है, ओर इस फलोबियन ट्यूब से बाहर निकलकर बच्चेदानी के परत पर चिपक जाते हैं । धीरे धीरे दो बच्चों का विकास होना आरंभ हो जाता है । तो जान लिया आपने आइडेंटिकल जुड़वा बच्चे कैसे बनते हैं ।
नोन आइडेंटिकल जुड़वा बच्चे कैसे बनते है ॽ
सबसे पहले अंडे की जो ठेली है उसमें से एक अंडा नहीं बल्कि, अंडाशय में से दो अंडे तैयार होकर निकल जाते है । सेक्स के समय जो पुरूष के शुक्राणु रिलीज होते है, वह तेजी से फैलते हुऐ बच्चेदानी के लिंक से गुजरकर बच्चेदानी में प्रवेश करते हैं, ओर वहाँ से फलोबियन ट्यूब में प्रवेश करते हैं । फलोबियन ट्यूब में शुक्राणु तेजी से अंडे की और बढते हैं , ओर दोनों ही अंडों का भेट एक एक शुक्राणु से हो जाता है । तो इस तरह एक नहीं दो जायगॉट बनते हैं । जायगॉट में कुच परिवर्तन आता है, ओर आगे जाकर दो भ्रूण तैयार होता है । अब ये जो भ्रूण है इनमें कुच परिवर्तित भी होता है , ओर ये फलोबियन ट्यूब से बाहर निकलकर बच्चेदानी के परत पर चिपक जाते हैं । ओर धीरे धीरे दो बच्चों का विकास होना आरंभ हो जाता है । तो आपने जान लिया होगा कि जुड़वा बच्चे कैसे बनते हैं ।
दिलचस्प बातें
क्योंकि जो आइडेंटिकल ट्विन्स है उनमें जो एक ही जो जायगॉट होता है, वही तुट के दो भ्रूण बनाता है, इसलिए दोनों बच्चों का जो सेक्स होता है वह सेम होना चाहिए, यानी अगर आपके आइडेंटिकल ट्विन्स है तो या वह दो लड़के होगे , या दो लड़कियां । ओर दोनों की सकल जो होंगीं वह एक दूसरे से मिलती जुलती होगी । दूसरी जो नोन आइडेंटिकल ट्विन्स दो शुक्राणु दो अंडों के साथ मेल करते हैं, दो भ्रूण तैयार होते हैं । तो इसलिए इस परिस्थिति में दोनों ही बच्चों का जो सेक्स है वह सैम होना होना अनिवार्य नहीं है । यानी एक लड़का और एक लड़की भी हो सकते हैं । ओर दोनों की सकलों में भी काफी फरक हो सकता है ।
( एक सवाल ) जुडवा बच्चे होते क्यू है ॽ
आइडेंटिकल ट्विन्स जो होते है , उनके उपर कोई ऐसा कारण नहीं मिला है , मेडिकल रिसर्च ने बहोत ज्यादा कोशिश किया है , पर कोई ठोस कारण अभी तक नहीं मिला है ।
जुड़वा बच्चों के संबंधित एक खास बात बतानी है । यह है की जुड़वा बच्चे मां की गर्भाशय मे तो साथ-साथ रहते ही हैं , वहाँ तो उनका संबंध रहता ही है, जन्म लेने के बाद भी उनका जो मानसिक ताल-मेल है यानी मानसिक कनेक्शन है वो भी बना रहता है । आप जन्म के बाद जुड़वा बच्चों को अलग करते हैं , तो मेडिकल रिसर्च ने देखा है कि दोनों बच्चों में तनाव भी आ सकता है , ओर उनके विकास में बाधा भी पड सकती हैं । तो हे ना एक दिलचस्प बात ।

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